DIVINE LOVE

DIVINE LOVE

Love is like a ladder, from the middle of which, if we go down, then love takes the form of lust, hatred, greed, ego, etc., which we call illusion (Maya). In this condition, love is called an illusion, and when this love is at the top, it becomes a prayer, and later on, this love takes the form of God and this is divine love. Normally what we think of as love is not love because we have a sense of ownership over others, we do not give freedom to others and where there is no freedom there is no love but there is deception in its name. Love that focuses on the other cares for the happiness and freedom of the other and the love that is self-centered is not love. If we love a woman or man, if the same woman or man starts loving another woman or man, then we are filled with anger, hatred, and the love that reaches the lowest level, how is that love?

प्रेम एक सीडी की तरह है जिसके बीच के पायदान से अगर हम निचे की तरफ जाते है तो प्रेम काम वासना , घ्रणा , लोभ , अहंकार आदि का रूप ले  लेता है जिसे हम भ्रम (माया ) कहते है इस दशा में प्रेम एक भ्रम कहलाता है और यही प्रेम जब ऊपर के पायदान पर होता है तो यह प्रार्थना बन जाता है और आगे चलकर यही प्रेम परमात्मा का रूप ले लेता है !सामान्य रूप से जिसे हम प्रेम समझते है वो प्रेम नहीं है क्यूंकि इसमें हमारी दुसरे पर  मालकियत की भावना होती है हम दुसरे को स्वतंत्रता नहीं देते और जन्हा स्वतंत्रता नहीं वंहा प्रेम नहीं बल्कि उसके नाम पर धोखा है! प्रेम दुसरे पर केन्द्रित होता है वह दुसरे के सुख और स्वतंत्रता की फ़िक्र करता है और जो प्रेम आत्म केन्द्रित होता है वह प्रेम , प्रेम नहीं होता ! अगर हम किसी स्त्री या पुरुष से प्रेम करते है अगर वही स्त्री या पुरुष किसी दुसरे स्त्री या पुरुष को प्रेम करने लगे तो हम क्रोध , घ्रणा से भर जाते है और जो प्रेम निचे के पायदान पर पहुँच जाता हो वो प्रेम कैसे ? 

How to make your love divine

If you want to climb on the top rung of ladder in the form of love and want to take your love to God, then first you have to convert your love into prayer. With an unwavering faith the glimpse of that divine has to be seen everywhere and you have to start it with the thing or person which is very dear to you.The woman or man in whom you see beauty is not the beauty of the body, the body is made up of five great elements, but the beauty in it is the glimpse of God, just as the glimpse of the moon is visible in the lake, so is the beauty of that woman or man. belongs to that divine, if you observe a rose flower in a scientific way, you will not find anything except minerals in it, but there is beauty in it, it is reflected in it, there is nothing in a poem except words, but there is poetry in it, only poetry. This poetry and this beauty in the flower is a glimpse of God, just catch it and move towards that real God. As you start experiencing these glimpses deeply, your mind will become calm and such a state of silence will arise that there will not even be a flower between you and that flower, there will only be God and the day you attain this state, understand that your love has become God.

अपने प्रेम को दिव्य कैसे बनाएं?

अगर आप प्रेम रुपी सीडी के उपरी पायदान पर चढना चाहते हो और अपने प्रेम को परमात्मा तक ले जाना चाहते हो तो पहले आपको अपने प्रेम को प्रार्थना(अहोभाव ) में रूपांतरित करना होगा ! एक अटूट श्रधा के साथ उस परमात्मा की झलक को हर जगह देखना होगा और  इसकी  शुरुवात तुम्हे उस पदार्थ या व्यक्ति से करनी होगी जो तुम्हे अती प्रिय है ! जिस स्त्री या पुरुष में तुम्हे सोंदर्य दिखाई देता है वह सरीर का  सोंदर्य नहीं हैं सरीर तो पंचमहाभूतो से बना है लेकिन उसमे जो सोंदर्य है वो परमात्मा की ही झलक है जैसे चंद्रमा की झलक झील में दिखाई देती है वैसे ही उस स्त्री या परुष का सोंदर्य उस परमात्मा का ही है , अगर एक गुलाब के फूल का आप वैज्ञानिक तरीके से निरिक्षण करोगे तो उसमे खनीज पदार्थ  के अलावा कुछ नहीं पाओगे लेकिन उसमे सोंदर्य है वो तो झलकता ही है, एक कविता में शब्दों के अलावा क्या है कुछ नहीं पर उसमें काव्य तो है बस कविता मैं यह काव्य और फूल मैं  यह सोंदर्य परमात्मा की ही झलक है बस इसे ही पकड़ना और उस असली परमात्मा की तरफ बढ़ना है आप जैसे जैसे इन झलको को गहराई से अनुभव करने लगोगे आपका चित शांत होता जायेगा और एक ऐसी मौन दसा उत्पन्न होगी की आपके और उस फूल के बीच में फूल भी नहीं होगा सिर्फ परमात्मा ही होगा और जिस दिन इस दशा को उपलब्ध हुए तो समझो तुम्हारा प्रेम परमात्मा हो गया !


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