STATE OF MIND

 STATE OF MIND

One is understanding and the other is practice. The practice that is done is only for the unintelligent because without practicing they do not understand at all. They are like those blind people who are repeatedly explained that the door of the house is from here but they do not understand and they repeatedly hit the wall . This is one one type state of mind and those who have understanding i.e. eyes do not need to explain. They can see the door clearly while reading and they go out of it.This id second type state of mind.
   This is how we are, we keep getting sorrows in the world, but still we are not able to leave the sorrows because we have attached our happiness to the world itself. Think if you come to know that your house is on fire, will you keep asking from where the door is? You will run straight from the door or window from wherever you will find a way, you will get out of there immediately, but regret you do not see your sorrows like fire, because you have become used to these sorrows and imagining your happiness. Therefore we have to change this type state of mind.

एक है समझ और दूसरा है अभ्यास। जो अभ्यास किया जाता है वह केवल नासमझों के लिए होता है क्योंकि बिना अभ्यास के उन्हें समझ ही नहीं आता। वे उन अंधों की तरह हैं जिन्हें बार-बार समझाया जाता है कि घर का दरवाजा यहीं से है लेकिन वे नहीं समझते और बार-बार दीवार से टकराते हैं। यह एक प्रकार की मनःस्थिति है और जिनके पास समझ यानी आंखें हैं उन्हें समझाने की जरूरत नहीं है उन्हें दरवाज़ा साफ़ दिखाई देता है और वे उससे बाहर निकल जाते हैं। यह दूसरे प्रकार की मानसिक स्थिति होती है।
   हम ऐसे ही हैं, हमें संसार में दुख तो मिलते रहते हैं, लेकिन फिर भी हम दुखों को छोड़ नहीं पाते, क्योंकि हमने अपने सुख को संसार से ही जोड़ रखा है। सोचिए अगर आपको पता चले कि आपके घर में आग लग गई है तो क्या आप यही पूछते रहेंगे कि दरवाजा कहां है? आप सीधे दरवाजे या खिड़की से जहां भी रास्ता मिलेगा, वहां से भाग जाएंगे, लेकिन अफसोस है कि आपको अपने दुख आग की तरह दिखाई नहीं देते, क्योंकि आप इन दुखों के आदी हो गए हैं और अपनी खुशी की कल्पना कर रहे हैं। इसलिए हमें इस प्रकार की मनःस्थिति को बदलना होगा।

Will we be free from this type state of mind by leaving the world?

No, not at all because where will you go after leaving the world? Wherever you go, you will find the world only. You will get rid of the physical world only after death, not before that. Yes, if you leave this type state of mind means the belief of happiness towards the world, imagination while you are alive, then you can be free from this type sate of mind  & sorrows you get from the world. That's why we have to leave our mind (imagination, lust) and not the world because mind is only our illusion which is called Maya in the eastern country (India).

क्या संसार छोड़कर हम इस प्रकार की मनःस्थिति से मुक्त हो जायेंगे?

नहीं, बिल्कुल नहीं क्योंकि दुनिया छोड़कर कहां जाओगे? आप जहां भी जाएंगे, आपको संसार ही संसार मिलेगा। भौतिक संसार से मुक्ति मृत्यु के बाद ही मिलेगी, उससे पहले नहीं। हाँ, यदि आप जीवित रहते हुए इस प्रकार की मनःस्थिति अर्थात् संसार के प्रति सुख की धारणा, कल्पना को त्याग दें तो आप इस प्रकार की मनःस्थिति तथा संसार से मिलने वाले दुःखों से मुक्त हो सकते हैं। इसलिए हमें संसार को नहीं बल्कि अपने मन (कल्पना, वासना) को छोड़ना होगा क्योंकि मन ही हमारा भ्रम है जिसे पूर्वी देश (भारत) में माया कहा जाता है।

How we can change our state of mind

You don't have to do anything to change your state of mind just wake up because we have been sleeping for a long time, we have to come to our senses and consciously look at this world and the happenings in it, then you will see the truth.The state of mind we are living in right now is imaginary! We are looking at this world through our imaginations and desires i.e. window and through this we see this world as we want to see, so to change the state of mind we have to come to our senses and wake up and see this world. When we wake up we will see the truth and nothing else.

हम अपनी मन:स्थिति को कैसे बदल सकते हैं ?

आपको अपनी मन:स्थिति को बदलने के लिए कुछ भी नहीं करना है, बस जागना है क्योंकि हम काफी समय से सो रहे हैं, हमें होश में आना होगा और सचेत होकर इस दुनिया और इसमें होने वाली घटनाओं को देखना होगा, फिर आप देखेंगे सच.अभी हम जिस मानसिक स्थिति में जी रहे हैं वह काल्पनिक है! हम इस दुनिया को अपनी कल्पनाओं और इच्छाओं यानी खिड़की के माध्यम से देख रहे हैं और इसके माध्यम से हम इस दुनिया को वैसे ही देखते हैं जैसा हम देखना चाहते हैं, इसलिए मन की स्थिति को बदलने के लिए हमें अपनी इंद्रियों में आना होगा और जागना होगा और इस दुनिया को देखना होगा। जब हम जागेंगे तो हमें सच्चाई ही दिखेगी और कुछ नहीं।


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