SPIRITUAL MEANING

SPIRITUAL MEANING 

हम चाहे लाख पूजा पाठ करे , मंदिर जाये,मस्जिद जाये , सेवा करे , हवन करे ,भक्ति करे लेकिन जब तक हमारा मन इधर उधर दौड़ रहा है एक जगह नहीं रुका समझो तब तक हम धार्मिक नहीं है और तुम कुछ भी न करो और चाहे इश्वर  को भी न मानो पर अगर तुमारा मन निर्विचार है समझो  तुम धार्मिक हो  सब ध्यान आदि व्यर्थ है जब तक मन है  और जब तक मन है तब तक  संसार है और जब मन नहीं समझो परमात्मा है और यंही Spiritual meaning है !

science of spirituality

मन की दो अवस्थाएं हैं, एक दौड़ता हुआ मन, एक ठहरा हुआ मन। दौड़ता हुआ मन, निरंतर ही जहां होता है, वहां नहीं होता। ऐसा समझें कि दौड़ता हुआ मन कहीं भी नहीं होता। दौड़ता हुआ मन सदा ही भविष्य में और अतीत में  होता है। आज नहीं होता, अभी नहीं होता, यहां नहीं होता। कल, आगे, कहीं और, कल्पना में, सपने में, कहीं दूर भविष्य में या फिर अतीत के स्मरण में  होता है और भुत - भविष्य का कोई अस्तित्व नहीं है। अस्तित्व है वर्तमान का, अभी का, इसी क्षण का।

अगर अधार्मिक आदमी की हम कोई परिभाषा करना चाहें, तो वह परिभाषा ऐसी नहीं हो सकती है कि वह आदमी, जो ईश्वर को न मानता हो। क्योंकि ऐसे बहुत—से व्यक्ति हुए हैं, जो ईश्वर को नहीं मानते और धार्मिक हैं। महावीर हैं, बुद्ध हैं, वे ईश्वर को नहीं मानते हैं, पर परम धार्मिक हैं। उनकी आस्तिकता में रत्तीभर भी संदेह नहीं। और अगर बुद्ध और महावीर की धार्मिकता में संदेह होगा, तो इस पृथ्वी पर फिर कोई भी आदमी धार्मिक नहीं हो सकता।

अधार्मिक आदमी उसे नहीं कह सकते हैं, जो ईश्वर को न मानता हो। अधार्मिक आदमी उसे भी नहीं कह सकते, जो वेद को न मानता हो, बाइबिल को न मानता हो, कुरान को न मानता हो। अधार्मिक आदमी केवल उसे कह सकते हैं कि जिसके पास केवल दौड़ता हुआ मन है, ठहरे हुए मन का जिसे कोई अनुभव नहीं। फिर वह कुछ भी मानता हो—ईश्वर को मानता हो, आत्मा को मानता हो; वेद को, कुरान को, बाइबिल को मानता हो— अगर दौड़ता हुआ मन है, तो वह आदमी धार्मिक नहीं है। और फिर चाहे वह कुछ भी न मानता हो, लेकिन अगर ठहरा हुआ मन है, तो वह आदमी धार्मिक है। क्योंकि मन जहां ठहरता है, वही तत्‍क्षण उस परम सत्ता से संबंध जुड़ जाता है। यही Science of Spirituality है !

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