सनातन धर्म- हिन्दू धर्म सनातन धर्म नहीं

सनातन धर्म

मनुष्य का स्वाभाव तीन प्रकार का होता है एक कर्म प्रधान स्वभाव , दूसरा ज्ञान प्रधान और तीसरा भाव प्रधान ! जो मनुष्य शरीर के तल पर ही जीते है उनका स्वभाव कर्मप्रधान होता है और जो बुद्धि के तल पर जीते है उनका स्वभाव ज्ञान प्रधान होता है और जो मनुष्य ह्रदय के तल पर जीते है वो भाव प्रधान स्वभाव के होते है और इसी स्वभाव के अनुसार उनकी गति होती है अगर कोई मनुष्य ज्ञान प्रधान हो और भक्ति (भाव प्रधान ) के रस्ते पर चले तो समझो की वो अपने स्वभाव से च्युत हो रहा है जैसे कोई कमल का फूल गुलाब का फूल बनने की कोशिस कर रहा है ! भगवान कृष्ण ने गीता में कंहा है  "स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥"अपने धर्म में तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरे का धर्म भय को देने वाला है॥ यंहा धर्म से भगवान का तात्पर्य मनुष्य के अपने स्वभाव से है न की हिन्दू , मुस्लिम धर्म से, पर लोगो ने और तथाकथित हिन्दू धर्म के ठेकेदारों ने इसे हिन्दू धर्म से जोड़ लिया जो की बिलकुल ही गलत है !

सनातन धर्म क्या है ?

    आज हिन्दू धर्म के ठेकेदार हिन्दू धर्म को सनातन धर्म बोलते है जो की सरासर गलत है क्यूंकि सनातन का अर्थ होता है  सदा से और वो हिन्दू धर्म सदा से नहीं है ! हिन्दू धर्म सबसे पुराना है यह जरूर बात है  पर सदा से नहीं है !जो सदा से है वो है मनुष्य का , प्रयेक जीव का मूल स्वभाव जिसे हम आत्मा कन्हे ,परमात्मा कहे ,धर्म कन्हे या अन्य कोई नाम दे  और दूसरी बात हिन्दू ,मुस्लिम, सिख ,ईसाई, बोद्ध , जैन आदि धर्म नहीं है यह सब संप्रदाय है ,हाँ  ये सब धर्म के पीछे चलने वाले जरूर है क्यूंकि जंहा  भीड़ होती है वो सम्प्रदाय कहलाता है जबकि धर्म एक बिलकुल ही व्यक्तिक और निजी बात है !

सनातन धर्म


ॐ शब्द न हिन्दू का है और न मुसलमान का बल्कि सबका है अन्य धर्मों में भी ॐ के महत्व का वर्णन मिलता है। जैन, बौद्ध दर्शन के अलावा सिख धर्म में भी ॐ का महत्व प्रतिपादित किया गया है। सिख धर्म में कहा गया है – इक ओमकार सतनाम करता पुरुख…। अर्थात इस सम्पूर्ण जगत का स्वामी एक है। इस्लाम और ईसाई धर्म में भी ॐ अक्षर की ध्वनि महसूस की जाती है। कहा जाता है कि अमीन भी ॐ का विकृत रूप है।

अतः मनुष्य को अंत में मैं कहना चाहूँगा की मनुष्य को अपने मूल स्वभाव के अनुसार ही चलना चाहिए चाहे दुसरे का धर्म अर्थात स्वभाव उसे कितना ही आकर्षित करें !




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