WHAT IS TRUE RELIGION ?

 WHAT IS TRUE RELIGION ?

आज एक कट्टर धार्मिक चाहे हो हिन्दू हो या मुसलमान ,ईसाई हो या सिख , बोधिस्त हो या जैन वो अपनी धार्मिकता की आड़ में अपनी वासनाओ , क्रोध आदि को अपने अंदर दबाता है क्यूंकि अगर वो इनको प्रकट करता है तो लोगो की नजर में उसकी धार्मिकता दो कोड़ी की सिद्ध हो जाए इसलिए वह इनका दमन करता चला जाता है , पर यह उनका दमन ज्यादा समय तक नहीं चल पाता और कोई न कोई बहाना बहार निकलने के लिए खोज ही लेता है !आज जितने भी यह साम्प्रदायीक दंगे हो रहे है सब इस दबे हुए क्रोध का ही परिणाम है चाहे वो दंगे गोरक्षा के नाम पर हो या फिर कोई अन्य कारण हो जो उनकी धार्मिक भावना को ठेस पहुचने से सम्बंधित हो ! इनका यह क्रोध धर्म की रक्षा के लिए निकल पड़ता है क्यूंकि धर्म की रक्षा का इनको बहाना मिल जाता है इसको ही अच्छे की आड़ में बुराई का नाम दिया जाता है ! ऐसी धार्मिकता की आड़ में ये लोग ऐसा मोका मिलने पर पुरे के पुरे दरिन्दे हो जाते है , यंहा तक की यह लोग बच्चो तक की भी हत्या कर देते है , उनकी  दमित काम वासनाओ को ऐसा मोका मिलने पर बलात्कार तक करने लगते है ! इसलिए इन सबका कारण सिर्फ एक ही है और वो है हमारी दमित वासनाये और क्रोध और इनको दमित करने का कारन है हमारे ये झूठे धर्म , जो हमे इन वासनाओ और क्रोध को रूपांतरण की जगह दमन करना सिखा रहे है !

        जो धर्म या उनके प्रचारक हमे दमन सिखाता है वो झूठे है उनके प्रचारक साधू , पादरी जो भी है वो सब पाखंडी है क्यूंकि उनको धर्म का कोई ज्ञान नहीं है उनको यह तक नहीं पता की काम , क्रोध आदि यह हमारे अंदर की उर्जाये है इनका दमन करोगे तो यह विस्फोट की तरह कंही न कंही से निकलेगे ही ! उर्जाओ का रूपांतरण किया जाता है न की दमन जैसे खाद की दुर्गन्ध का  खेतो में डालने पर उनका फूल बनकर सुगंध में रूपांतरण होता है ऐसे ही काम का अगर सही मार्गदर्शन मिले तो काम का प्रेम में  और क्रोध का करुना में , लोभ का दान में  और अहंकार का समर्पण में रूपांतरित हो जाता है !

मैं तुम्हे अपने धर्म को छोड़ने के लिए नहीं बोलता और न ही मेरा उद्देश्य कोई आपकी धार्मिक भावनाओ को ठेस पहुचाना है लेकिन तुम जो अन्धो की तरह धार्मिक कर्म कर रहे हो उनकी तरफ आँख खोलकर देखने के लिए बोल रहा हूँ आखिर कब तक आप इस भीड़ का हिस्सा बने रहेंगे अब तो जागो इस भीड़ से बहार निकलो ! यह भीड़ ही है जो तुम्हे धर्म की रक्षा के नाम  पर दरिन्दगी निकालने का बल देती है ! एक अकेला  दमित धार्मिक आदमी दरिंदगी करने में दस बार सोच सकता है पर भीड़ में नहीं ! यह भीड़ ही है जिसने इतने दंगे करवाए , मस्जिद तुडवाई , मंदिर तुड्वाए !

अक्सर यह देखा गया है जो उग्र परवर्ती के लोग होते है ,अहंकारी , क्रोधी वो ही ज्यादा धार्मिकता दिखाते है क्यूंकि सीधे सीधे उनका उपद्रव यह समाज बर्दाश नहीं करता लेकिन धर्म की आड़ में इनको मोका मिल जाता है और फिर अपने आपको धार्मिक कहने वाले मूढो की देश में कोई कमी नहीं है इसलिए उनका साथ भी मिल जाता है और फिर सोने पर सुहागा ! इस प्रकार ऐसे दरिन्दे लोग नेता बन जाते है और देश का खूब शोषण करते है ! इसलिए मैं इन सब दंगो , उपद्रवो का कारण तुम्हारे तथाकतित धर्मो को मानता हूँ जो तुम्हे सही सिक्षा  नहीं देते ! इसलिए अंत में आपसे निवेदन करता हूँ अपनी इस झूठी धार्मिकता को छोड़े और जो असली धर्म है उसमें जागे ! जो की तुम्हारा मूल सवभाव है न तो वो हिन्दू है और न ही मुसलमान न वो जैन है और न बोध और न सिख , ईसाई ! वो सिर्फ सुद्ध जागरण है !

WHAT IS TRUE RELIGION






कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.
Welcome to How Live Life Consultancy chat with us on WhatsApp
Parnam, How may I help you? ...
Click me to start the chat...